राजस्थान की कला और संस्कृति

    राजस्थान की कला और संस्कृति 






 राजस्थान के प्रमुख मन्दिर 



मन्दिर 
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1. अजमेर के प्रमुख मन्दिर 

सोनी जी की नसिहा :-
- निर्माण की शुरुआत  मूलचंद सोनी ने की थी लेकिन टीकम चंद सोनी ने पूर्ण करवाया।
- प्रथम जैन तीर्थंकर आदिनाथ (ऋषभदेव) को समर्पित है।
- इस मंदिर को लाल मंदिर भी कहते हैं

ब्रह्मा मन्दिर :- 
- पुष्कर में भारत का एकमात्र मंदिर है।
- इसका प्रारंभ शंकराचार्य ने किया था पूर्ण      गोकुल चन्द पारीक ने करवाया।
- रत्नागिरी पहाड़ी पर सावित्री मंदिर स्थित है
- सरस्वती सावित्री की पुत्री थी।

वराह मंदिर:-
- पुष्कर में स्थित यह मंदिर इतिहास में प्रसिद्ध है।
- इस मंदिर का निर्माण अर्णोराज ने करवाया था।
- बाद में जहांगीर ने इसकी मूर्ति को पानी में फिकवा दिया। 

रंगनाथ मन्दिर:-
- पुष्कर में स्थित इस मंदिर का निर्माण द्रविड़ शैली में है। 
- राजस्थान में द्रविड़ शैली का सबसे बड़ा मंदिर है। 

- यहां पर विष्णु और लक्ष्मी सिंह पर सवार है।
- इसका निर्माण 1844 में पूरणमल ने करवाया था।

रमा बैकुण्ठ मंदिर:- 
- पुष्कर में स्थित यह मंदिर रामानुज संप्रदाय से संबंधित है।
- इसका निर्माण डीडवाना के सेठ मगनीराम ने करवाया था।

महादेव मंदिर:- 
- इसका निर्माण मराठों के सेनापति ग्वालियर के अन्ना जी सिंधिया ने करवाया था।

काचरिया मंदिर:- किशनगढ़ में स्थित है। 
आनन्दी माता मंदिर:- 


2. अलवर के प्रमुख मन्दिर

नील कण्ठ महादेव मंदिर:-
- अजय पाल बड़गुजर ने करवाया था।
- यहां नाँचते हुए गणेश जी की मूर्ति है।
- यह गुर्जर प्रतिहार शैली का मंदिर है।

बुढ़े जगन्नाथ मंदिर:- 
- अलवर में स्थित इस मंदिर में रथ यात्रा निकाली जाती है। 

सोमनाथ मंदिर:- 
- यह मंदिर भानगढ़ में स्थित है। 
- इसका निर्माण 1631 में माधोसिंह ने करवाया था। 

पाण्डू पोल हनुमान मंदिर:- 
- यहां शयन मद्रा में हनुमान जी की मूर्ति है।
- भाद्रपद  में यहां मेला लगता है। 

भर्तृहरि  मंदिर:- 
- यह मंदिर सरिस्का में स्थित है।
- भाद्रपद और वैसाख में मेला लगता है।
- इसे कन्नफटे साधुओं का कुंभ कहा जाता है।

तिजारा का जैन मंदिर:- 
- यह अलवर में स्थित है।
- आठवें तीर्थंकर चंद्रप्रभु का मंदिर है।
- मूर्ति देहरा गांव में मिली थी।

नौगावा का जैन मंदिर:- 
- यह मंदिर अलवर में स्थित है।
- इसका निर्माण 746 ईसवी में हुआ था।
- यह मल्लिनाथ जी का मंदिर ही है।
- यहा मल्लिनाथ जी की पीठ पर प्रशस्ति लिखी हुई मिली है।

नील कण्ठ जैन मंदिर:-
- अलवर,  पार्श्वनाथ जी से सम्बन्धित है। 

नारायणी माता का मंदिर:- 
- अलवर में बरवा डुंगरी पहाड़ी पर स्थित है। 
- नाईयो की कुल देवी है। 


3. बांसवाड़ा के प्रमुख मन्दिर 

 लकुलिश मंदिर:-
 - अरथुना भगवान शिव के 22 वे अवतार पशुपति संप्रदाय का निर्माण चामुंडा राज ने करवाया था।
 - महाराणा प्रताप लकुलीश संप्रदाय से संबंधित थे।


छीछ का ब्रह्मा मंदिर:- बांसवाड़ा।
 - निर्माण जगमाल सिसोदिया ने करवाया।

मंडलेश्वर शिव मंदिर:- 
 - परमार राजा मंडल ने पंचायतन शैली में निर्माण करवाया था।

घोटिया अंबा मंदिर:- 
- बांसवाड़ा अमावस्या को मेला लगता है।

त्रिपुरा सुंदरी मंदिर:- तलवाड़ा बांसवाड़ा।
- वसुंधरा राजे चुनाव जीतने के बाद सीधे यहां पर आकर दर्शन करती है।

4. बाड़मर के प्रमुख मन्दिर 

किराडू का मंदिर:- 
- हात्मा गांव बाड़मेर शिव मंदिर है।
- इसे राजस्थान का खजुराहो की कहा जाता है।

नाकोडा मंदिर:-
- मेवानगर पार्श्वनाथ बालोतरा।

रणछोड़ मंदिर:- खेड़ा बाथो।
- निर्माण 1173 ईस्वी में हुआ।

गरीब नाथ मंदिर:- शिव तहसील में।
- कोमनाथ ने निर्माण करवाया था।

ब्रह्मा मंदिर:- आसोतरा बाड़मेर।
- इसका निर्माण 1984 में खेतेश्वर महाराज ने करवाया पुरोहितों के थे।

मल्लिनाथ का मंदिर:- तिलवाड़ा बाड़मेर।
- लूनी नदी के किनारे राजस्थान का प्राचीन पशु मेला भरता है चैत्र कृष्ण एकादशी चैत्र शुक्ल एकादशी तक।

आलम जी धोरा मंदिर:- गुडामालानी बाड़मेर।
- इसे घोड़ों का तीर्थ स्थल भी कहा जाता है।

विरात्रा माता का मंदिर:-
- चौहटन बाड़मेर में भोपा जाति की कुलदेवी मानी जाती है

हल्देश्वर महादेव मंदिर:- पिपलोद/लघु माउंट।

नागणेची माता मंदिर:- नागाणा गांव बाड़मेर।
- नागणेची माता राठौड़ों की कुलदेवी है। 
लकड़ी की मूर्ति है यह मूर्ति कर्नाटक से आई थी पहले माता का नाम चक्रेश्वरी माता था।

कपालेश्वर महादेव मंदिर:-
चौहटन बाड़मेर पहाड़ी पर किले के अवशेष मिले थे।
- इसके नजदीक एक पहाड़ी पर हापाकोर्ट नामक दुर्ग के अवशेष मिले थे।
- कानड़ देव के भाई सालीम सिंह के पुत्र हापा ने बनवाया था।






 राजस्थान के प्रमुख मेले



राजस्थान में 33 जिले हैं हम 33 जिलों के प्रमुख मेलों के बारे में जानेंगे प्रत्येक जिले के मेले का विस्तार से जानेंगे। 

शुरुआत हम बलिदान की भूमि चित्तौड़गढ़ से करेंगे

चित्तौड़गढ़ के प्रमुख मेले 

A. मातृकुण्डिया मेला – राश्मी चितौड़गढ में चन्द्रभागा नदी के किनारे, राजस्थान का हरिद्वार।

B. मीरा महोत्सव – आश्विन पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) को अक्टूबर में लगता है।

C. जौहर मेला – इतिहास सम्बन्धी मेला।

D. दीवानेशाह का उर्स – कपासन चितौड़ में।

E. सांवलिया जी का मेला – मंडफिया में, इसे अफीम मंदिर भी कहते है।

F. राम-रावण मेला – बड़ी सादडी चितौड़ में।

G. राज्य स्तरीय मेवाड़ उद्योग उत्सव – दिसम्बर में।

H. मरमी माता का मेला 


उदयपुर के प्रमुख मेले 

A. ऋषभदेवजी का मेला – जिसे कालाजी, केसरिया जी मेला भी कहते है। ये उदयपुर के धुलैव में लगता है। हिन्दू-जैन सद्भाव का मेला।

B. शिल्पग्राम महोत्सव – हवाला ग्राम, उदयपुर में दिसम्बर में लगता है।

C. एकलिंगजी का मेला – कैलाशपुरी अजमेर।

D. मेवाड़ महोत्सव – अप्रैल में लगता है।


प्रतापगढ़ के प्रमुख मेले 

A. सीतामाता का मेला – ज्येष्ठ अमावस्या को लगता है।

B. गोतमेश्वेर मेला – अरनोद।

C. भँवरमाता का मेला – छोटी सादड़ी (प्रतापगढ़)।

डूंगरपुर के प्रमुख मेले 

A. बेणेश्वर मेला – गाँव नवाटापूरा, तहसील आसपुर में सोम-माही-जाखम संगम पर माघ पूर्णिमा को लगने वाला मेला, इसे आदिवासियों, वांगड तथा भीलों का कुम्भ कहते है। यह वांगड का सबसे बड़ा मेला है। इसमें खंडित शिवलिंग की पूजा होती है। यह स्थान संत मावजी से जुड़ा है।

B. पीर फखरूद्दीन का उर्स – गलियकोट (डूंगरपुर) में लगता है यह शिया मुसलिम दाऊदी बोहरा का सबसे बड़ा उर्स है।

C. नीला-पानी मेला

D. देव-सोमनाथ मेला

E. हरमात्या मेला


बांसवाडा के प्रमुख मेले 

A. घोटियाअम्बा माता का मेला – घोटिया में आदिवासियों का दूसरा कुम्भ (प्रथम बेणेश्वर मेला)।

B. त्रिपुरा सुन्दरी का मेला – तलवाड़ा बांसवाडा

c. घाटी रणछोड़ मेला


राजसमन्द के प्रमुख मेले

A. अन्नकूट महोत्सव – कार्तिक शुक्ल एकम को नाथद्वारा में लगता है।

B. जन्माष्टमी – नाथद्वारा।

C. प्रताप जयंती – जयेष्ठ शुक्ल तृतीया को हल्दीघाटी में लगता है।

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