भारत के प्रमुख उद्योग

 

भारत के प्रमुख बृहत उद्योग


वस्त्र उद्योग:


1. भारतीय उद्यमशीलता संस्थान कहां स्थित है - गुवाहाटी

2. भारत में आधुनिक स्तर की पहली सूती कपड़ा मिल कब और कहां स्थापित की गई थी - 1818 फॉक ग्लॉस्टर (नॉट: सपोर्ट क्लस्टर कोलकाता के निकट स्थित है)

3. भारत में सूती (कॉटन) की ज्यादातर मिली हुई अवस्था में स्थित है - गुजरात महाराष्ट्र और तमिलनाडु

4. भारत के 2 सबसे प्रमुख सूती उद्योग केंद्र कहां कहां स्थित है - अहमदाबाद और मुंबई

5. सिले सिलाए कपड़ों के निर्यात संवर्धन के लिए देश का पहला वस्त्र पार्क कहां स्थापित किया गया - न्यू तिरूपुर टीएम
(नोट: एट्टीवरम्पालायम गांव का नया नाम ही न्यू तिरुपुर है)


लोहा और इस्पात उद्योग:

1. भारत में लोहा और इस्पात उद्योग का आरंभ कब कब और किस कंपनी द्वारा किया गया था - 1870 ईस्वी कुल्टी, बंगाल आयरन वर्क्स
(नोट कुल्टी पश्चिम बंगाल राज्य में स्थित है)

2. सार्वजनिक सरकारी क्षेत्र की पहली लौह इस्पात कंपनी की स्थापना कब, कहां और किस नाम से की गयी- 1923 ई।, भद्रावती (कर्नाटक), विस्को
(नोट: विस्को- विश्वेश्वरैया आयरन एंड स्टील कंपनी)

3. देश के लोहपत मंदिर के प्रबंधन की जिम्मेवारी भारतीय इस्पात प्राधिकरण ('स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया': सेल) को कब दी गई? इसका मुख्यालय कहां स्थित है - 1974 ई।, नई दिल्ली

4. विशेष और मिश्रपत और लोहिश कारखाना कहां कहां स्थित है - दुर्गापुर और सलेम


सीमेंट उद्योग:

1. भारत में सीमेंट का पहला कारखाना कब और कहां स्थापित किया गया था जो कालांतर में बंद हो गया - 1904 ई।, मद्रास संवितरण

2. भारत में सीमेंट उद्योग की मूल नींव कब और किस कंपनी की स्थापना से पड़ी है? इस की स्थापना कहां की गई थी - 1914 ई।, भारतीय सीमेंट कंपनी लिमिटेड, पोरबंदर (गुजरात)

3. एसोसिएटेड सीमेंट कंपनीज लिमिटेड एसीसी की स्थापना कब कब की गई थी? इसका मुख्यालय कहां स्थित है - 1936 ईस्वी, मुंबई


चीनी उद्योग:

1. चीनी उत्पादन (गन्ना + चुकन्दर) में विश्व में भारत का कौन सा स्थान है - II

2. चीनी खपत में विश्व में प्रथम स्थान किस देश का है - भारत

3. भारत में चीनी मिलों की सर्वाधिक संख्या किस राज्य में है - महाराष्ट्र

4. चीनी उद्योग के विकास के लिए धन एकत्र करने के लिए चीनी विकास कोष का गठन कब किया गया था - 1982 ई।

5. इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ शुगर टेक्नोलॉजीज कहाँ स्थित है - कानपुर


कोयला उद्योग:

1. भारत में कोयले की खोज का श्रेयिन दो अंग्रेजों को जाता है जिनके प्रयास से 1774 ईस्वी में पश्चिम बंगाल राज्य के रानीगंज और वीर पृष्ठभूमि क्षेत्र में कोयले का उत्खनन कार्य प्रारंभ हुआ था - संस्कार व हैटली

2. भारत में उपलब्ध शक्ति के साधनों में सबसे महत्वपूर्ण उद्योग है - केक

3. भारत में ऊर्जा उपभोग में कोयले का अंश कितना प्रतिशत है - 67%

4. तेल उत्पादन के क्षेत्र में भारत का विश्व में कौन सा स्थान है - चौथा

5. वर्तमान समय में भारतीय तेल उद्योग का संचालन और नियंत्रण सार्वजनिक क्षेत्र के किन दो संस्थानों द्वारा किया जाता है - कोल इंडिया व सिंगरेनी कोलरीज

6. सिंगरेनी कोलरीजिन सरकारों का संयुक्त उपक्रम है - आंध्र व भारत

7. कोल इंडिया लिमिटेड का देश में कोयले के कुल उत्पादन का लगभग कितना प्रतिशत पर नियंत्रण है - 86%


भारत के कुछ और प्रमुख उद्योगों का विश्लेषणात्मक अध्ययन 


कागज उद्योग :

कागज का पहला सफल कारखाना 1879 में लखनऊ में लगाया गया।
मध्यप्रदेश के नेपानगर में अखबारी कागज तथा होशंगाबाद में नोट छापने के कागज बनाने का सरकारी कारखाना है।


रासायनिक उर्वरक उद्योग :

ऐतिहासिक रूप से देश में सुपर फास्फेट उर्वरक का पहला कारखाना 1996 में तमिलनाडु के रानीपेट नामक स्थान पर स्थापित किया गया था।
1944 में कर्नाटक के बैलेगुला नामक स्थान पर मैसूर केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स के नाम से अमोनिया उर्वरक का कारखाना लगाया गया।
1947 में अमोनिया सल्फेट का पहला कारखाना केरल के अलवाय नामक स्थान पर खोला गया।
भारतीय उर्वरक निगम की स्थापना 1951 में की गई।
इसके तहत एशिया का सबसे बड़ा उर्वरक संयंत्र सिंदरी में स्थापित किया गया।
भारत पोटाश उर्वरक के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर है।
भारत में नाइट्रोजन उर्वरक की खपत सबसे अधिक है।
भारत में 2010 - 2011 में NPK उर्वरकों की प्रति हेक्टेयर खपत 140.14 किग्रा थी।
भारत में प्रति हेक्टेयर पूर्वक खपत में प्रथम स्थान पंजाब का है और दूसरा एवं तीसरा स्थान क्रमश: आंध्रप्रदेश तथा हरियाणा का है।
कोक आधारित उर्वरक इकाइयां तालचर (उड़ीसा), रामागुंडम (आंध्रप्रदेश) तथा कोरबा (छत्तीसगढ़) में अवस्थित है।
क्रभको का गैस आधारित यूरिया-अमोनिया सयंत्र हजीरा (गुजरात) में है।
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर तथा जगदीशपुर के कारखाना भी गैस आधारित है 


जलयान निर्माण उद्योग: 

भारत में जलयान निर्माण का प्रथम कारखाना 1941 ई. में सिंधिया स्टीम नेविगेशन कंपनी द्वारा विशाखापट्टनम में स्थापित किया गया था।

1952 में भारत सरकार द्वारा इसका अधिग्रहण करके हिंदुस्तान शिपयार्ड विशाखापट्टनम नाम दिया गया था।
सार्वजनिक क्षेत्र की अन्य इकाइयां जो जलयानों का निर्माण करती हैं -
गर्डे नरिच वर्कशॉप लिमिटेड - कोलकात्ता
गोवा शिपयार्ड लिमिटेड - गोवा
मंझ गांव डाक लिमिटेड - मुम्बई


वायुयान निर्माण उद्योग :

भारत में हवाई का निर्माण का प्रथम कारखाना 1940 में बेंगलुरु में हिंदुस्तान एयरक्राफ्ट कंपनी के नाम से स्थापित किया गया है।
अब इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के नाम से जाना जाता है।
आज बेंगलुरु में ही 5 इकाइयां तथा कोरापुट, कोरवा, नासिक, बैरकपुर, लखनऊ, हैदराबाद तथा कानपुर में 11 अन्य वायुयानों के निर्माण कार्य में सलंग्न है।


मोटरगाड़ी उद्योग :

मोटरगाड़ी उद्योग को विकास उद्योग के नाम से जाना जाता है।
इससे सबंधित प्रमुख इकाइयां -
हिंदुस्तान मोटर - (कोलकत्ता)
प्रीमियर ऑटोमोबाइल्स लि. - (मुंबई)
अशोक लीलैंड - (चेन्नई)
टाटा इंजिनियरिंग एन्ड लोकोमोटिव कम्पनी लि. - (जमशेदपुर)
महिंद्रा एन्ड महिंद्रा लिमिटेड - (पुणे)
मारुती उद्योग लि. - गुड़गांव (हरियाणा)
सनराइज इंडस्ट्रीज - (बंगलुरु)


दवा निर्मण उद्योग :

प्रमुख स्थान  -  मुंबई, दिल्ली, कानपूर, हरिद्वार, ऋषिकेश, अहमदाबाद, पुणे, मथुरा एंव हैदराबाद।


शीशा उद्योग :

भारत में शीशा उद्योग का केन्द्रीकरण रेन की सुविधा वाले स्थानों में देखने को मिलता है।
इस उद्योग का विकास मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र व तमिलनाडु राज्य में हुआ है।
फिरोजाबाद एंव शिकोहाबाद भारत में शीशा उद्योग के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। 

पश्चिम बंगाल :- बेलगछिया, सीतारामपुर, रिसड़ा, बर्द्धवान, रानीगंज एंव आसनसोल।

झारखंड:- जमशेदपुर, हजारीबाग, धनबाद।

महाराष्ट्र:- मुंबई, पुणे, दादर, सतारा, शोलापुर एंव नागपुर।

गुजरात:-बड़ौदा, मौरवी,

बिहार:- पटना एंव कुहलगाँव

राजस्थान:- जयपुर

उत्तर प्रदेश:- नैनी, रामनगर, बहजोई, बालाबाली एंव फिरोजाबाद।

अन्य स्थान:- अम्बाला, अमृतसर, हैदराबाद, जबलपुर एंव गुवाहाटी। 


अभियांत्रिकी उद्योग :

देश में हटिया, दुर्गापुर, अजमेर, जादवपुर आदि प्रथम स्थान पर है।
भारी इंजीनयरिंग निगम लिमिटेड (HEC) रांची की स्थापना 1958 में की गई थी।
कुटीर उद्योग बोर्ड : 1948
केंद्रीय सिल्क बोर्ड : 1949
अखिल भारतीय हथकरघा बोर्ड : 1950
अखिल भारतीय खादी एंव ग्रामोद्योग  बोर्ड : 1954
अखिल भारतीय हस्तकला बोर्ड : 1953
लघु उद्योग बोर्ड : 1954
केंद्रीय विक्रय संगठन : 1958

रेल उपकरण उद्योग :

चित्तरंजन (पश्चिम बंगाल) रेल इंजन बनाने का सबसे पुराना कारखाना है। 

इसकी स्थापना 26 जनवरी 1950 के दिन चित्तरंजन लोकोमेटिव वर्क्स  नाम से शुरू हुई। 

वर्तमान  यहां विधुत इंजन का निर्माण किया जा रहा है। 

डीज़ल से चलने वाले इंजन निर्माण वाराणसी में होता ही। 

रेलवे इंजन का निर्मण कार्य जमशेदपुर (झारखण्ड) में भी किया जाता है। 

रेल के डिब्बे बनाने  प्रमुख केंद्र चेन्नई के समीप पेरंबूर नामक स्थान पर 1952 में स्थापित किया गया और इसने उत्पादन की शुरुआत 2 अक्टूबर 1955 से हुई इसके अन्य प्रमुख केंद्र बेंगलुरु तथा कोलकाता में है।
पंजाब के कपूरथला में इंट्री कल कोच फैक्ट्री की स्थापना की गई है।
रायबरेली उत्तर प्रदेश कचरापारा पश्चिम बंगाल में रेलवे कोच फैक्ट्री की नई उत्पादन इकाइयां लगाई गई है।
केरल के पाला कार्ड में भी रेल कोच फैक्ट्री लगाई जा रही है।
बिहार के मंडोरा में डीजल इंजन में मधेपुरा में विद्युत इंजन कारखाना लगाया जा रहा है।
छपरा बिहार में रेल वहीं फैक्ट्री स्थापित की गई है।
पश्चिम बंगाल के धनकुनी में विद्युत व डीजल इंजन के अवयव बनाने की फैक्ट्री लगाई जा रही है
आईआईटी रुड़की मैं देश के पहले रेलवे इंजन थॉमसन को सुरक्षित किया गया है।
ऊनी वस्त्र उद्योग भारत में उन्नी वस्त्र की पहली मेल 18 क्षेत्र में कानपुर में स्थापित की गई परंतु इस उद्योग का वास्तविक विकास 1950 के बाद ही हुआ।
पंजाब में लुधियाना जालंधर धारीवाल अमृतसर इस दोगे महत्वपूर्ण केंद्र हैं।
ब्रिटेन अमेरिका कनाडा जर्मनी आदि भारतीय कालीनों के महत्वपूर्ण आयातक हैं।


बिजली के सामान 

भोपाल, हरिद्वार, रामचंद्रपुरम, हैदराबाद, तिरुचिरापल्ली तथा कोलकाता बिजली के सामान बनाने के महत्वपूर्ण केंद्र हैं


टेलीफोन उद्योग :

बंगलुरु तथा रूपनारायणपुर टेलीफोन उद्योग के महत्वपूर्ण केंद्र है।


रेशम उद्योग :

भारत एक ऐसा देश है जहां शहतूती, एरी, तसर एवं मूंगा सभी 4 किस्मों की रेशम का उत्पादन होता है।
मूंगा रेशम उत्पादन में भारत को एकाधिकार प्राप्त है।
कर्नाटक देश का 41% से अधिक कच्चा रेशम उत्पादन करता है।
यहां शाहतूती रेशम बनाया जाता है।
यह देश का 56% रेशमी धागा बनाया जाता है।
भारत में कुल कपड़ा निर्यात में रेशमी वस्त्रों का योगदान लगभग 3% है।
गैर शहतुती रेशम मुख्य असम बिहार और मध्य प्रदेश से प्राप्त होता है।


चर्म उद्योग :

भारत में चर्म उद्योग के मुख्य केंद्र कानपुर, आगरा, मुंबई, कोलकाता, पटना तथा  बेंगलुरु में है।
कानपुर चर्म उद्योग का सबसे बड़ा केंद्र है।
यह जूते बनाने के लिए प्रसिद्ध है।


उद्योगों से सबंधित कुछ परिभाषाएँ -


1. कृषि पर आधारित उद्योग : जो उद्योग कृषि उत्पादों को औद्योगिक उत्पादों में परिवर्तित करता है

2. आधारभूत उद्योग : ये भारी उद्योग हैं जो अन्य उद्योगों के लिए आधारभूत हैं।
जैसे-लोहा तथा इस्पात उद्योग।

3. सहकारी उद्योग : ये उद्योग लोगों के समूह द्वारा व्यवस्थित किए जाते हैं जो कि कच्चे माल के उत्पादक होने के साथ-साथ एक दूसरे के सहयोग से उद्योगों को चलाने में भी मदद करते हैं।

4. उपभोक्ता उद्योग : ये उद्योग प्रमुख रूप से लोगों के उपभोग के लिए वस्तुएँ प्रदान करते हैं।

5. कुटीर उद्योग : ये उद्योग घरों या गाँवों में छोटे पैमाने पर चलाए जाते हैं।

6. भारी उद्योग : ये उद्योग भारी कच्चे माल का प्रयोग कर भारी तैयार माल का निर्माण करते है।
जैसे : लोहा और इस्पात उद्योग।

7. उद्योग : कारखाने की उत्पादन क्रिया के द्वारा कच्चे माल के मूल्य में वृद्धि को उद्योग कहते हैं

8. संयुक्त उद्योग : वे उद्योग जो राज्य सरकार तथा निजी क्षेत्रा के संयुक्त प्रयास से चलाए जाते हैं।

9. हल्के उद्योग : ये उद्योग कम भार वाले कच्चे माल का प्रयोग कर हल्के तैयार माल का उत्पादन करते हैं। जैसे- इलेक्ट्रॉनिक्स, पंखे आदि।

10. बड़े पैमाने के उद्योग : हर इकार्इ में बड़ी संख्या में लोगों को राजगार देने तथा उत्पादन स्तर में वृद्धि करने वाले उद्योग।
जैसे जूट या पटसन उद्योग।

11. खनिज आधारित उद्योग : जो उद्योग खनिज उत्पादों को तैयार माल में परिवर्तित करते हैं।

12. सार्वजनिक क्षेत्रा के उद्योग : इन उद्योगों का स्वामित्व केन्द्र तथा राज्य दोनों सरकारों के पास होता है। जैसे- बी.एच.र्इ.एल., एच.र्इ.सी. तथा एन.टी.पी.सी.।

13. प्राथमिक उद्योग : ये कच्चे माल के उत्पादन के उद्योग हैं।

14. निजी क्षेत्रा के उद्योग : इन उद्योगों का स्वामित्व तथा नियंत्राण एक व्यक्ति, फर्म या कंपनी के हाथ में होता है।

15. द्वितीयक उद्योग : ये उद्योग प्राथमिक उद्योगों द्वारा तैयार किए माल का प्रयोग करके वस्तुओं का निर्माण करते हैं।

16. छोटे पैमाने के उद्योग : कम संख्या में लोगों को रोजगार देना तथा लगभग दो करोड़ पूँजी निवेश करने वाले उद्योग जैसे-सिले-सिलाए वस्त्रों का उद्योग।



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